भारत में कौन क्या हैं। India Gk in Hindi
जब भी भारतीय सिनेमा में एक खौफनाक विलेन या दमदार स्क्रीन प्रेजेंस वाले कलाकार की बात होती है, तो प्रदीप राम सिंह रावत (Pradeep Ram Singh Rawat) का चेहरा आंखों के सामने आ जाता है।
चाहे 80 के दशक में टीवी पर 'महाभारत' का अश्वत्थामा हो, 'लगान' का देवा हो या फिर आमिर खान की ब्लॉकबस्टर फ़िल्म 'गजनी' का खूंखार गजनी धर्मात्मा प्रदीप रावत ने अपनी आवाज़ और अदाकारी से हर बार दर्शकों को हैरान किया है।
अगर आप भी इस बेहतरीन अभिनेता के जीवन और उनके फ़िल्मी सफ़र के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं, तो यह ब्लॉग आपके लिए ही है!
जन्म: 21 जनवरी 1952 (उत्तराखंड, भारत)
पहचान: अभिनेता (बॉलीवुड, साउथ सिनेमा और टेलीविज़न)
प्रसिद्ध रोल: अश्वत्थामा (महाभारत), गजनी (गजनी), देवा (लगान), भिक्षु यादव (Sye)
अवार्ड्स: फ़िल्मफ़ेयर अवार्ड फॉर बेस्ट विलेन - तेलुगु (2004)
प्रदीप राम सिंह रावत का जन्म उत्तराखंड के एक परिवार में हुआ था। उन्हें बचपन से ही अभिनय का शौक था। उन्होंने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत 1980 के दशक में की।
करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट 1988 में आया, जब बी.आर. चोपड़ा ने अपने पौराणिक धारावाहिक 'महाभारत' में उन्हें गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा की भूमिका दी। उनकी कड़क आवाज़, लंबे कद-काठी और आंखों के गुस्से ने इस किरदार को जीवंत कर दिया। इस एक रोल ने उन्हें भारत के घर-घर में मशहूर कर दिया।
90 के दशक में प्रदीप रावत ने बॉलीवुड फ़िल्मों का रुख किया। शुरुआत में छोटे-मोटे किरदार करने के बाद उन्हें बड़े बैनर की फ़िल्मों में जगह मिलने लगी:
सरफ़रोश (1999): आमिर खान के साथ इस फ़िल्म में उन्होंने 'सुल्तान' का रोल निभाया, जिसे काफी सराहा गया।
लगान (2001): आशुतोष गोवारिकर की इस ऑस्कर-नॉमिनेटेड फ़िल्म में वे 'देवा' के किरदार में दिखे। विलेन की छवि से हटकर, इस पॉजिटिव और जुझारू क्रिकेटर/गेंदबाज़ के रोल में उन्होंने साबित कर दिया कि वे हर तरह की भूमिका निभा सकते हैं।
प्रदीप रावत के करियर की सबसे ऐतिहासिक फ़िल्म साबित हुई 'गजनी'।
तमिल वर्ज़न (2005): निर्देशक ए.आर. मुरुगदॉस ने जब सूर्या (Suriya) के साथ तमिल में 'Ghajini' बनाई, तो विलेन के रोल के लिए प्रदीप रावत को चुना। फ़िल्म सुपरहिट रही।
हिंदी रीमेक (2008): जब आमिर खान के साथ इसका हिंदी रीमेक बना, तो मुरुगदॉस ने हिंदी में भी मुख्य विलेन 'गजनी धर्मात्मा' के लिए प्रदीप रावत पर ही भरोसा जताया।
उनका यह रोल इतना खौफनाक और असरदार था कि दर्शक थिएटर में कांप उठे। यह फ़िल्म हिंदी सिनेमा की पहली 100 करोड़ी फ़िल्म बनी।
हिंदी सिनेमा के साथ-साथ प्रदीप रावत ने साउथ इंडियन फ़िल्म इंडस्ट्री (तेलुगु, तमिल, कन्नड़, मलयालम) में भी अपनी जबरदस्त पहचान बनाई।
एस. एस. राजामौली की फ़िल्म 'Sye' (2004): इस तेलुगु फ़िल्म में उन्होंने 'भिक्षु यादव' नाम के विलेन का किरदार निभाया, जिसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ खलनायक का फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार मिला।
इसके अलावा उन्होंने छत्रपति, भद्रा, स्टालिन, जगदम और नायक जैसी कई बड़ी साउथ फ़िल्मों में विलेन का किरदार निभाकर अपनी धाक जमाई।
भारी और गंभीर आवाज़: उनकी आवाज़ में एक ऐसा भारीपन है जो डायलॉग्स में अपने आप जान डाल देता है।
दमदार स्क्रीन प्रेजेंस: लंबा कद और तीखे नैन-नक्श उन्हें स्क्रीन पर देखते ही एक मजबूत छाप छोड़ते हैं।
वर्सेटिलिटी (विविधता): क्रूर विलेन बनने के साथ-साथ उन्होंने लगान में गंभीर देशभक्त और ग्रैंड मस्ती जैसी फ़िल्मों में कॉमेडी भी बखूबी की है।
Q1. प्रदीप रावत का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
उत्तर: उनका जन्म 21 जनवरी 1952 को उत्तराखंड में हुआ था।
Q2. फ़िल्म 'गजनी' में मुख्य विलेन कौन था?
उत्तर: फ़िल्म 'गजनी' में मुख्य विलेन का किरदार प्रदीप राम सिंह रावत ने ही निभाया था।
Q3. क्या प्रदीप रावत ने साउथ की फ़िल्मों में भी काम किया है?
उत्तर: हाँ, वे तेलुगु और तमिल सिनेमा के सबसे लोकप्रिय विलेन में से एक रहे हैं और उन्होंने राजामौली जैसे दिग्गज निर्देशकों के साथ काम किया है।
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