भारत में कौन क्या हैं। India Gk in Hindi
सुनने में अजीब लगता है कि देश का इतना बड़ा शिक्षा सुधारक बचपन में स्कूल ही नहीं गया। दरअसल, लद्दाख के उनके गांव में तब कोई स्कूल नहीं था। 11 साल की उम्र तक उन्होंने अपनी मातृभाषा (लद्दाखी) में अपनी मां से ही घर पर पढ़ाई की। इसके बाद जब उनका दाखिला दिल्ली के स्कूल में हुआ, तो भाषा न समझ आने के कारण उन्हें मानसिक रूप से कमजोर समझ लिया गया था। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और खुद को साबित किया।
जब उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग करने का फैसला किया, तो उनके पिता (जो एक सरकारी अधिकारी/राजनेता थे) चाहते थे कि वह सिविल इंजीनियरिंग करें। पिता से मतभेद के कारण उन्होंने घर से आर्थिक मदद नहीं ली। अपनी पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए उन्होंने खुद बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया और अपनी फीस भरी।
वांगचुक द्वारा स्थापित SECMOL कॉलेज की सबसे अनोखी बात यह है कि यहाँ लद्दाख के उन बच्चों को प्राथमिकता दी जाती है जो बोर्ड परीक्षाओं में फेल हो जाते हैं। वांगचुक का मानना है कि जो छात्र पारंपरिक रटने वाली शिक्षा में फेल होते हैं, वे असल जिंदगी और व्यावहारिक ज्ञान में जीनियस हो सकते हैं। आज यहाँ के पास-आउट स्टूडेंट्स बड़े-बड़े आंत्रप्रेन्योर और लीडर्स हैं।
उनके द्वारा बनाए गए सोलर मड हट्स (मिट्टी के घर) इतने एडवांस हैं कि लद्दाख की कड़कड़ाती ठंड में भी बिना किसी हीटर या लकड़ी जलाए, सिर्फ सूरज की किरणों को ट्रैप करके अंदर का तापमान बेहद गर्म रखा जाता है। यहाँ तक कि सौर ऊर्जा से वहां पानी तक उबाला जाता है, जिससे भारतीय सेना को सीमा पर बहुत मदद मिल रही है।
वह लद्दाख में HIAL (Himalayan Institute of Alternatives, Ladakh) नाम की एक ऐसी यूनिवर्सिटी बना रहे हैं, जहां छात्र सिर्फ थ्योरी नहीं पढ़ेंगे। अगर कोई छात्र वहां बिजनेस पढ़ रहा है, तो वह कॉलेज के अंदर एक असली बिजनेस चलाएगा। अगर कोई टूरिज्म पढ़ रहा है, तो वह एक होटल या होमस्टे मैनेज करेगा। यानी "Earn While You Learn" का असली मॉडल।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें